भारत की अनुपम देन है वास्तुशास्त्र

हजारों वर्ष पूर्व भारतीय ऋषि-मनीषियों के व्यापक अनुसन्धान से सृजित वास्तुशास्त्र प्राचीनतम उपलब्ध विज्ञानों में से एक है तथा पूरे विश्व को भारत की एक अनुपम देन है जो जाति, धर्म और देश की सीमाओं से उठकर मानवमात्र का कल्याण करने को कटिबद्ध है. आधुनिक आर्किटेक्चरल विज्ञान किसी भी भवन को सुन्दर और सुविधाजनक बनाने में तो सक्षम है किन्तु उस भवन में निवास या व्यवसाय करने वाले लोगों के सुखपूर्वक जीवनयापन की गारंटी केवल भारतीय वास्तुशास्त्र ही देता है. वास्तुशास्त्र के नियमों का पालन करने का जितना महत्व है उतना ही महत्व वास्तुशास्त्र के विभिन्न नियमों के सम्बन्ध में व्याप्त भ्रांतियों से बचने का भी है. कई लोग वास्तु के नियमों की जानकारी होने पर भी उनके क्रियान्वयन के सही तरीकों का पता नहीं होने के कारण जीवन भर एक्सपेरिमेंट्स करते हुए दुखों का सामना करते रहते हैं. उदाहरणार्थ अधिकांश लोग आज भी उप-दिशाओं अर्थात ईशान, वायव्य, आग्नेय और नैरूत को सदैव ही भवन अथवा प्लाट के कोनों में ही स्थित मानकर चलते हैं जबकि ऐसा हमेशा नहीं होता. परिणामतः अनजाने में ही वास्तु नियमों का उल्लंघन हो जाने से सुख प्राप्ति के स्थान पर जीवन कष्टों से घिर जाता है. दरअसल वास्तु विज्ञान में गणना और आंकलन का आधार चुम्बकीय उत्तर (मेग्नेटिक नोर्थ) होता है जबकि प्रायः लोग भौगोलिक उत्तर अर्थात सूर्योदय को वास्तु परीक्षण का आधार बना लेते हैं और भूल जाते हैं कि दक्षिणायन और उत्तरायण में सूर्य उगने की दिशा में तो पर्याप्त अंतर आ जाता है. नियमों का पालन और परिणामों की सटीकता का सीधा सम्बन्ध केवल चुम्बकीय उत्तर से है. किसी भी भूखंड विशेष से मेग्नेटिक नोर्थ का कितने डिग्री विक्षेप है, उसकी जानकारी करके एवं तदनुरूप ही अष्ट दिशाओं के व्याप क्षेत्र की गणना करके ही वास्तु का सम्पूर्ण लाभ लेना संभव है. केवल वास्तुनुरुप नक्शा बनवाना ही पर्याप्त नहीं होता वरन भूखंड के चयन, सेटबेक, नक्शा, निर्माण प्रक्रिया, आतंरिक सज्जा, एलिवेशन, रंग योजना इत्यादि का भी वास्तुनुरुप होना आवश्यक है. विवाह और गृह निर्माण किसी भी व्यक्ति के जीवन को सर्वाधिक प्रभावित करने वाले कारक होते हैं. अतः घर को नीम-हकीमों के हवाले नहीं करना चाहिए. वास्तुशास्त्र अच्छे समय में आपके लाभ को दुगुना और बुरे समय में हानि को आधा करने में सक्षम है. एक ओर हमारे ही देश के कई लोग अभी भी वास्तुशास्त्र की विश्वसनीयता को संदेह की दृष्टि से देखते हैं जबकि पूरी दुनिया में धूम मचाने वाले वास्तुशास्त्र की वैज्ञानिकता को आधुनिक विज्ञान और पाश्चात्य जगत नमन कर रहा है.

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» हर्ष वर्द्धन हर्ष said: { Aug 17, 2010 - 06:08:47 }

शानदार पोस्ट के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।

» rao gumansingh said: { Oct 7, 2010 - 10:10:52 }

Jai ramji ri bhai saheb,
apro blog umda hai …

apro moto bhai

rao gumansingh
(Birthdate 29.10.1968)

» Ar. Mukesh Rathore, AKME DESIGN STUDIO, Jaipur said: { Nov 1, 2010 - 12:11:30 }

Vastu is baseclly art of living. Its just simply thinks of third eye. ( aur ye vision dunia ke harek insan ke pass hota hai.) many thinks arrenge by law of nature in perticular place. its “VASTU” . like “PAVCHTATVA” FIRE, WATER, EARTH, SPACE & AIR.

RK Sutar ji Badai ke patra hai……. Jan sadaran ke jeevan ko uch banane ke liye… Jai ho..
-Ar. Mukesh Rathore,
AKME DESIGN STUDIO, Jaipur
09166858816, mukeshraathor@yahoo.com

» CA Shivratan singh Rajpurohit said: { Sep 19, 2011 - 09:09:37 }

Sir,
Vastu Shastra hamari sanskriti he …hamara Itihas he..or hamari Takat bhi he…lekin hum hi hamare Itihas se muh morne lagenge to bhala kon ise tavjo dega..aapka prayas bahut sarahaneey he….Bhagwan aapko apne uddeshya pura karne ki shakti pradan kare….. Jai Vishwakarmaji..